Zoassological Survey of India

Zoological Survey of India

Zoological Survey of India, Govt. Of India
 
MOEF
Print Icon

उद्देश्य

भारतीय प्राणी विज्ञान सर्वेक्षण (जेडएसआई) की स्थाापना 1 जुलाई, 1916 को पूर्व ''ब्रिटिश भारतीय साम्राज्य '' के असाधारण रूप से समृद्ध जीव के विभिन्न् पक्षों पर हमारे ज्ञान को आगे बढ़ाने के लिए सर्वेक्षण, अन्वेाषण तथा अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए की गई थी। सर्वेक्षण का उद्भव 1875 में कलकत्ता के भारतीय संग्रहालय में स्थित प्राणी विज्ञान अनुभाग की स्थाोपना के साथ हुआ। कर्मचारियों की संख्या में क्रमिक वृद्धि और अनुसंधान कार्यक्रम के विस्ताार से सर्वेक्षण ने पूर्व समय की चुनौतियों को पूरा किया और अब यह भविष्यं की मांग पूरा करने के मार्ग पर है। इसने आरंभ से अपने प्राथमिक उद्देश्योंे को अपरिवर्तित बनाए रखा है।

आरंभिक तौर पर, सर्वेक्षण ने एशियाटिक सोसायटी ऑफ बंगाल के पूर्व संग्रहालय (1814 -1875) से एक शताब्दीा से अधिक पुराने और कलकत्ता के भारतीय संग्रहालय के प्राणी विज्ञान अनुभाग (1875-1916) के प्राणी विज्ञान संग्रहों का अधिग्रहण किया है। जीवन विज्ञान में बढ़ती दिलचस्पील और देश की पंचवर्षीय योजना की शुरूआत के साथ सर्वेक्षण के विस्ताजर कार्यक्रम की शुरूआत की गई थी। सर्वेक्षण द्वारा अब तक 16 क्षेत्रीय और क्षेत्र

स्टे शनों की स्थावपना की गई है और इसने एक बड़े राष्ट्रीकय संस्था न का विकास किया है। यह राष्ट्री य प्राणी विज्ञान संग्रहों के अभिभावक के रूप में कार्य करता है, जहां प्रोटोजोआ से स्त्नधारी तक सभी जंतु समूहों के एक मिलियन से अधिक अभिज्ञात नमूने रखे गए हैं। देश के विभिन्नै भागों में सर्वेक्षण द्वारा जीव जंतुओं, व्यंवस्थित प्राणी विज्ञान, जंतु पारिस्थितिकी, वन्य जीवन और जंतु भूगोल, जंतु व्यतवहार, जंतु आबादी और समुद्री जीव जंतुओं के अध्य यन के लिए बृहत और सघन क्षेत्र अन्वेभषण किए हैं और इनके अन्वेपषण और अनुसंधानों के परिणाम नियमित रूप से स्वययं की पत्रिकाओं तथा राष्ट्री य और अंतरराष्ट्री य पत्रिकाओं में प्रकाशित होते हैं।

हाल ही में प्राणी विज्ञान अन्वेपषणों के लिए एक समेकित मार्ग के तौर पर प्रयास किए गए हैं, ताकि अधिक से अधिक उद्देश्यं उन्मुीख अनुसंधान किए जा सकें जिसमें जीव विज्ञान, कोशिका वर्गीकरण विज्ञान और पारिस्थितिकी पक्षों को शामिल किया जाए। जबकि वर्गीकरण विज्ञान इसमें एक प्रमुख भूमिका निभाता है। जनता की ओर से जंतु जीवन से संबंधित मामलों में बढ़ती दिलचस्पीग और आने वाली पूछताछों की संख्यान से संस्थाओन में लोगों का विश्वाोस झलकता है। विभाग में जाने माने प्राणी वैज्ञानिकों के निरंतर आगमन की कमी नहीं रही है।